
लुधियाना, पंजाब में पीसीएनएल (परक्यूटेनियस नेफ्रो लिथोटॉमी) सर्जरी उपलब्ध है। क्या आपको गुर्दे में पथरी की समस्या है? विशेष रूप से अगर आपको बड़ी, जटिल या फिर एक से ज्यादा पथरी की समस्या है। यह पथरी मूत्रमार्ग में तब बनती है, जब मूत्र में मौजूद रासायनिक तत्व क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं। पीसीएनएल (परक्यूटेनियस नेफ्रो लिथोटॉमी) एक आधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से एक बड़ी पथरी को सुरक्षित ढंग से ऊपरी मूत्रवाहिनी से निकाला जाता है। इस इलाज में गुर्दे की पथरी को निकालने के लिए कभी-कभी यूरेटेरोस्कोपी या फिर शॉक वेव लिथोट्रिप्सी का इस्तेमाल किया जाता है।
डॉ. राजेश खोसला की विशेषज्ञता की देखरेख में, खोसला किडनी स्टोन एंड सर्जिकल सेंटर में रोगियों को गुर्दे की पथरी के लिए पीसीएनएल का एक सुरक्षित और प्रभावी इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इस पारंपरिक तरीके से जुडी जानकारी और यह प्रक्रिया कैसे की जाती है? इसके बारे में जानने के लिए हमारे डॉक्टर आपको बेहतर मार्गदर्शन दे सकते हैं।
पीसीएनएल (परक्यूटेनियस नेफ्रो लिथोटॉमी) एक इस तरह की प्रक्रिया है, जो बड़े साइज की गुर्दे की पथरी वाले मरीजों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस प्रक्रिया में मरीज की त्वचा पर लगभग 1 सेमी का एक छोटा चीरा लगाया जाता है। पीसीएनएल प्रक्रिया की मदद से मरीजों की 15 मिमी या उससे भी ज्यादा बड़ी पथरी को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जा सकता है। कई बार, बेहतर तरीके की जरूरत होती है, और उस दौरान डॉक्टर मिनी पीसीएनएल करने की भी सलाह दे सकते हैं।
पीसीएनएल सर्जरी के लिए जर्नल एनेस्थीसिया की जरूरत होती है। इलाज की शुरुआत सर्जन द्वारा सिस्टोस्कोपी से की जाती है। इस प्रक्रिया में मूत्रवाहिनी और मूत्राशय के क्षेत्र को देखने के लिए मूत्रमार्ग के माध्यम से एक पतली रोशनी वाली दूरबीन को डाला जाता है। इसके बाद डॉक्टर गुर्दे में पथरी की सही स्थिति तक पहुँचने के लिए, पथरी वाले हिस्से में एक पतला कैथेटर डालते हैं, इससे सर्जन द्वारा सर्जरी करते समय गुर्दे को स्पष्ट रूप से देखने की सुविधा मिलती है।
यह डॉक्टर आपको बताएंगे, कि आपको पंजाब में पीसीएनएल (पर्क्यूटेनियस नेफ्रो लिथोटॉमी) सर्जरी करवानी है, या नहीं और सर्जरी किस स्थिति में की जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान ज्यादातर, आपको पेट के बल लेटना होता है, और अपने आप को हल्का दूसरी ओर झुकाना होता है। सर्जरी के दौरान डॉक्टर गुर्दे के हिस्से के ऊपर, पीठ पर एक छोटा चीरा लगाते हैं। पथरी के स्थान तक प्रभावी ढंग से पहुँचने के लिए पथरी का आकार लगभग 15 मिमी या उससे अधिक होता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान, यूरोलॉजिस्ट एक्स-रे चित्रों का उपयोग करते हैं। ट्रैक बनाने के बाद डॉक्टर एंडोस्कोप को लगाते हैं और पथरी को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं। पथरी को तोड़ने के लिए सर्जन अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और कई बार जेजे स्टेंट डालने की संभावना भी बहुत ज्यादा होती है।
पीसीएनएल सर्जरी के बाद कृपया निम्न दिए गए संकेतों और लक्षणों पर ध्यान दें, और इसमें से कोई भी संकेत अगर आपको दिखाई दें, तो आप जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
.कभी-कभी हल्की उल्टी या मतली होना।
.सर्जरी के बाद 24 से 48 घंटे के भीतर होने वाला दर्द, बार-बार पेशाब आने की शिकायत होना। ऐसी किसी भी समस्या की संभावना को कम करने के लिए, जल्द से जल्द डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को समय पर लेना बेहतर होता है।
.ऑपरेशन के बाद पेशाब में खून की मौजूदगी और पेशाब का रंग हल्का गुलाबी से लाल दिखाई दे सकता है। अगर खून का बहाव बहुत ज्यादा हो रहा है, तो कृपया इसे चिकित्सीय आपात स्थिति मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
यूरेटेरल स्टेंट एक पतली प्लास्टिक ट्यूब की तरह होती है, जिस को रोगी की सूजन को कंट्रोल करने और पेशाब को बाहर निकालने के लिए, मूत्रवाहिनी में लगाया जाता है।
आपका डॉक्टर सर्जरी के बाद आपके फॉलो-अप अपॉइंटमेंट पर आपकी स्थिति के अनुसार सही समय पर यूरेटेरल स्टेंट को निकाल देंगे। यह समय लगभग 1 से 6 हफ्तों के बीच होता है।
पेशाब करने की लगातार इच्छा के साथ पेट भरा हुआ महसूस होना एक आम बात है। इसके अतिरिक्त, पेशाब करने की कोशिश करते वक्त जलन और हिलने-डुलने में भी जलन जैसी समस्या महसूस हो सकती है।
हालांकि, पीसीएनएल प्रक्रिया ज्यादातर सुरक्षित होती है। पर, सर्जिकल तरीके में इसके कुछ जोखिम और जटिलताएं शामिल होती हैं। आमतौर पर इसके कुछ संभावित जोखिम कारक इस प्रकार हैं:
खून का बहाव : पीसीएनएल प्रक्रिया में खून का बहाव, हल्के से मध्यम हो सकता है। जटिलता और सुरक्षा दर ओपन सर्जरी के समान ही होती है। इसलिए, इस बारे में अपने सर्जन से एक बार सलाह जरूर लें।
संक्रमण : इस प्रकिरिया में संक्रमण की संभावना कम होती है, इसमें कोई संदेह नहीं है, पर यह सिर्फ तभी संभव होता है, जब आप डॉक्टर द्वारा निर्धारित जरूरी एंटीबायोटिक दवाओं को समय पर लेते हैं। अगर आपको बुखार, जलन और दर्द जैसे लक्षण बिगड़ते हुए और बढ़ते हुए दिखाई दें, तो आप इस दौरान जल्द से जल्द किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।
अंग या ऊतक की चोट: पीसीएनएल में आस-पास के अंगों या ऊतकों के घायल होने या चोट लगने की थोड़ी संभावना होती है। यह संभावित चोटें प्लीहा, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय, आंत या पित्ताशय तक हो सकती हैं।
अपनी इस उलझन को दूर करने के लिए और आपकी स्थिति के लिए कौन सी उपचार योजना सबसे ज्यादा ठीक रहेगी, यह अच्छे तरीके से जानने के लिए आप डॉ. राजेश खोसला से संपर्क कर सकते हैं। आपकी स्थिति की अच्छे तरीके से जांच करने के बाद ही, डॉक्टर आपके लिए सबसे प्रभावी इलाज योजना को तैयार करेंगे और फिर आपको बताएंगे।
अपने गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए क्या आप एक किसी अच्छे और विशेषज्ञ सर्जन की तलाश कर रहे हैं? तो आप खोसला किडनी स्टोन एंड सर्जिकल सेंटर में अपनी पहली अपॉइंटमेंट को बुक करें और डॉ. राजेश खोसला की विशेषज्ञता में एक सूचित निर्णय लें। वह आपके लक्षणों और जीवन की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए, आपको पथरी के प्रबंधन के लिए सबसे उपयुक्त इलाज के बारे में सलाह देंगे।
